सेमल के सुर्ख फूल फिर शाखों पर उतर आए,
फाल्गुन की आहट है, जाने में अब देर नहीं।

पेड़ों पे जैसे आग-सी रंगत खिली हुई है,
मौसम की ये रौनक ठहरती मगर देर नहीं।

अम्बर भी हर रात सितारों की चादर बिछाता है,
पर सुबह का सूरज आए तो फिर वो ढेर नहीं।

सेमल के फूलों को देख दिल ये पूछ उठता है,
मौसम तो लौट आया… तुम क्यों आए नहीं। 🌺